कोटोपैक्सी ज्वालामुखी Cotopaxi volcano

माउंट कोटोपैक्सी विश्व का सबसे ऊंचा सक्रिय ज्वालामुखी

माउंट कोटोपैक्सी ज्वालामुखी को संसार का सबसे ऊंचा सक्रिय ज्वालामुखी माना जाता है,यह दक्षिण अमेरिका में स्थित है।माउंट कोटोपैक्सी में हुए भयंकर और प्रलयकारी विस्फोट इसको इतिहास में एक अलग पहचान देते हैं,यह ज्वालामुखी समय समय पर प्रज्वलित होता रहा है

कोटोपैक्सी की स्थिति (Location of Cotopax

कोटोपैक्सी ज्वालामुखी दक्षिणी अमेरिका के  पैनमेरिकाना के पास क्विटो से लगभग 55 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है, स्पष्टता यह एक आंतरिक एंडियन पर्वत है लेकिन भूगर्भीय रूप से इसका श्रेय कार्डिलेरा सेंट्रल को दिया जाता है, एंडीज के कार्डिलेरा ओरिएंटल ,जो देश की उत्तर दक्षिण लंबाई में चलता है,में सबसे कम उम्र के और सबसे अधिक सक्रिय ज्वालामुखी हैं लेकिन कोटोपेक्सी उनमें से सबसे ऊंचा और खतरनाक सक्रिय ज्वालामुखी है।यह पर्वत श्रृंखला पश्चिम में अंतर्देशीय क्षेत्र और पूर्व में अमेजन से घिरी है।इसके अलावा यह ज्वालामुखी भूमध्य रेखा से 75 किलोमीटर दूरी पर स्थित ओरिएंट के पास है।

कोटोपैक्सी की संरचना (stracture of Cotopaxi)

यह ज्वालामुखी पर्वत स्वयं गहरे रंग के ट्रैकेटिक लावा के बारी बारी से प्रवाह वा हल्के रंग की राख के गिरने से बना है।इस ज्वालामुखी पर्वत की गहराई 1200 फीट है।

इस ज्वालामुखी का आधार खुले पहाड़ी घास के मैदान पर स्थित है,लेकिन पर्वत का ऊपरी भाग स्थाई बर्फ से ढका हुआ है।

कोटापैक्सी ज्वालामुखी एक शानदार ज्वालामुखी है,जो लगभग सम्मित्त शंकु आकर का है। कोटापैक्सी के उपर 820 फीट की गहराई का एक गड्ढा,यह गड्ढा 800×550 मीटर चौड़ा है।

कोटोपैक्सी की ऊंचाई (Hight of Cotopaxi)

कोटोपैक्सी ज्वालामुखी पर्वत में एक उत्तरी शिखर है और एक दक्षिणी शिखर ।उत्तरी शिखर की ऊंचाई 5897 मीटर है और दक्षिणी शिखर की ऊंचाई 5820 मीटर है जोकि उत्तरी शिखर से 77 मीटर कम है,कोटोपैक्सी राष्ट्रीय उद्यान का पार्किंग स्थल जो चढ़ाई का प्रारंभिक बिंदु है,4600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

कोटोपैक्सी ज्वालामुखी का तापमान (Taprature of Cotopaxi volcano)

कोटोपैक्सी ज्वालामुखी का तापमान ऊंचाई के आधार पर अलग अलग रहता है,यह हिमनद क्षेत्र में अधिकतम 10 डिग्री सेल्सियस से लेकर निचले दलदल में सबसे धूपववाले दिनों में 20 डिग्री सेल्सियस तक होता है।शिखर की ऊंचाई पर तापमान शाम सात बजे औसतन 5 डिग्री सेल्सियस तक और 12 बजे 0 डिग्री सेल्सियस रहता है।

कोटोपैक्सी का इतिहास (History of Cotopaxi)

कोटोपक्सी ज्वालामुखी से अक्सर लावा निकलता है और विस्फोट इतने भयानक होते हैं कि ज्वालामुखी के शिखर से सभी दिशाओं में गहरी घाटियों को नष्ट कर देते थे।जानते हैं की ज्वालामुखी में कब कब विस्फोट हुए और वो कितने भयानक और विध्वंसकारी

कोटोपैक्सी ज्वालामुखी में 1907 का विस्फोट (1907 Explosion in cotopaxi)

कोटोपैक्सी ज्वालामुखी का अंतिम सबसे भयानक विस्फोट सन 1907 में हुआ था,और इसमें उदगार के समय राख और छोटे छोटे पैरोक्लासिक प्रवाह उत्पन्न हुए ,लेकिन कोई लावा उत्पन्न नही हुआ। इससे पहले सन 1904 तथा 1906 में भी छोटे राख विस्फोट हुए थे लेकिन वो उतने ज्यादा महत्वपूर्ण नही थे और न ही उन विस्फोटों से विशेष हानि नहीं हुई।

कोटोपैक्सी ज्वालामुखी में 1903 और 1904 का विस्फोट (1903 and 1904 explosion in cotopaxi)

26 सितंबर 1903 को कोटोपेक्सी ज्वालामुखी एक बार फिर सक्रिय हुआ और उसमे एक माध्यम आकर का विस्फोट शुरू हुआ जो कि दिसंबर 1904 तक रुक रुक कर होता रहा।विस्फोट ज्वालामुखी के केंद्र से शुरू हुआ जिसने राख लावे का उदगार शामिल था।विस्फोट इतना भयानक था की ज्वालामुखी के आस पास राख का ऊंचा ढेर लग गया था।23 अक्टूबर को विस्फोट के दौरान भयंकर लावे का उदगार हुआ और उदगार के समय बिजली की रोशनी भी देखी गई।

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कोटोपैक्सी ज्वालामुखी में1880 का विस्फोट (1880 explosion in cotopaxi)

कोटोपैक्सी ज्वालामुखी के विस्फोटक इतिहास में 3 जुलाई 1880 का विस्फोट बहुत ही भयानक और रोमांचकारी था,

उस दिन का विस्फोट इतना भयानक था की 1 मिनट से भी कम समय में ज्वालमुखी के क्रेटर के उपर लगभग 20,000 फीट ऊंचाई की राख का स्तंभ बन गया,3 जुलाई 1880 का विस्फोट ब्रिटिश शोधकर्ता एडवर्ड व्हिंपर ने अपने साथियों के साथ अपनी आखों से देखा था,वह उस समय चिंबाराजो पर्वत पर चढ़ाई कर रहे थे,

उन्होंने बताया की  उन्होंने समुद्र तल से 15,800 फीट की ऊंचाई पर अपना डेरा डाला था।सुबह के समय हमने उत्तर में एलिनिजा की महान चोटी और 20 मील की दूरी पर देखा, जिसके पूर्व में कोटोपैक्सी की महान चोटी थी,वही एक मात्र अवसर huथा जिस समय हमने क्रेटर को धुएं से मुक्त देखा।सुबह 5 बजकर 45 मिनट पर ज्वालामुखी से स्याही जैसे धुएं का एक गुबार उठने लगा और देखते ही देखते वह क्रेटएर की रिम से 20,000 फीट उपर उठ गया, उस ऊंचाई पर धुएं को पूर्व से बहने वाली शक्तिशाली हवा का सामना करना पड़ा जिसके कारण वह प्रशांत महासागर की तरफ लगभग 20 मील की दूरी तक फ़ैल गया फिर वह उत्तर से बहने वाली हवा की गिरफ्त में आ गया और देखते ही देखते चारो दिशाओं में फैल गया।जैसे जैसे यह बादल के निकट आ रहा था वैसे वैसे यह आकार में और ऊंचा उठा हुआ लग रहा था।राख और धूएं के मिश्रण ने हमारे और सूर्य के बीच मानो दीवार खड़ी कर दी हो,और कई घंटे बाद हमने जो देखा उसने हमको चकित कर दिया,हमने हरे रंग का सूरज देखा और ऐसा हरा भरा की हमने कभी नही देखा था,हम यह नही समझ पा रहे थे की ये प्रभाव राख और धुएं की वजह से है या फिर हम विस्मय के बजाय भय से भरे हुए थे,हमने यह कुछ मिनट देखा और अगले पल यह परभाव समाप्त हो गया ऐसा आज तक हमने कुछ नही देखा था की उसकी तुलना की जाए लेकिन हमने अपने अपने जीवन का भव्य सूर्यास्त देखा।

कोटोपैक्सी ज्वालामुखी में 1877 का विस्फोट(1877 explosion in cotopaxi)

सन 1877 में जनवरी और सितंबर के मध्य कोटोपैक्सी ज्वालामुखी में चार भयंकर विस्फोट हुए थे।विस्फोट के दौरान ज्वालामुखी से भयंकर लावा और राख प्रवाहित हुई।विस्फोट इतने भयानक थे की ज्वालामुखी के आस पास राख के ढेर का पहाड़ सा लग गया।इन विस्फोटों में जान मॉल की काफी क्षति हुई जिसमे कई लोग मारे गए और काफी लोग घायल भी हुए थे।

इससे पहले सन 1853 में 13 से 15 सितंबर तक लगातार ज्वालामुखी प्रज्वलित हुआ था,लेकिन ये विस्फोट इतना प्रलयकारी नही था।

कोटोपैक्सी ज्वालामुखी में 1768 का विस्फोट (1768 explosion in cotopaxi)

4 सितंबर 1768 को कोटोपैक्सी ज्वालामुखी में भयंकर और ऐतिहासिक विस्फोट हुआ, विस्फोट इतना  भयंकर था कि कई लोगो की मौत भी हो गई थी और ज्वालामुखी पर्वत के आस पास की वनस्पतियां और जीव जंतु नष्ट हो गए।कोटोपैक्सी के इतिहास में ये विस्फोट भी महत्वपूर्ण था।

कोटोपैक्सी ज्वालामुखी में 1766 का विस्फोट (1766 explosion)

सन 1766 में कोटोपैक्सी ज्वालामुखी एक बार फिर से सक्रीय हुआ, इस बार का विस्फोट भी प्रलयकारी  था इस बार इसमें कई मध्यम आकार के विस्फोट हुए जिससे निकली राख और लावे ने लटकूंगा शहर को पूरी तरह से तहस नहस कर दिया और ज्वालामुखी के पश्चिम में जो खेत थे वो भी लावे और राख की चपेट में आकर नष्ट हो गए।

कोटोपैक्सी ज्वालामुखी में 1744 का विस्फोट (1744 explosion in cotopaxi)

कोटोपैक्सी  ज्वालामुखी में सन 1744 में फिर से सक्रिय हुआ था और उसमे भीषण उदगार हुआ जो की इतना उग्र था की ज्वालामुखी के पश्चिम में 10 किलोमीटर क्षेत्र में 7 से 18 सेंटीमीटर मोटी राख की परत जम गई थी।

सन 1744 के पहले भी कोटोपेक्सी ज्वालामुखी समय समय पर प्रज्वलित होता रहा है। कोटोपेक्सी पर अध्य्यन करने वाले शोधकर्ताओं के अनुसार लगभग 4500 साल पहले कोटोपेक्सी फटने की वजह से भारी हिमस्खलन हुआ था।

कोटोपैक्सी पर पहुंच (Accesess to cotopaxi)

कोटोपैक्सी ज्वालामुखी के शिखर तक पहुंचने के दो संभावित रास्ते हैं,एक रास्ता उत्तर की तरफ से है और एक रास्ता पर्वत के दक्षिण से है।

उत्तरी मार्ग शिखर के शीर्ष तक जाने के लिए प्रयोग किया जाता है।उत्तरी मार्ग कोटोपेक्सी नेशनल पार्क के पार्किंग स्थल से लगभग 1200 मीटर ऊर्ध ऊंचाई और 3 किलोमिटर शिखर तक है।कोटोपेक्सी पर चढ़ाई करने का प्रारंभिक बिंदु कोटोपेक्सी नेशनल पार्क का पार्किंग स्थल हैं,पार्क के पार्किंग स्थल से एक 4800 मीटर खड़ी रेतीली ढाल ज्वालामुखी के शिखर तक ले जाती है।

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