इरैटोस्थनीज भूगोल के जनक(Eratosthenes Father Of Geography)

इरैटोस्थनीज भूगोल के पिता(Eratosthenes Father of Geography)

महान भूगोलविद, गणितज्ञ, एवम खगोलशास्त्री इरैटोस्थनीज का जन्म 276 ईसा पूर्व में साईरेन में हुआ था।

इरैटोस्थनीज के पिता का नाम एग्लाओस था। साईरेन जो उस समय एक यूनानी शहर था अब लीबिया में है।इरैटोस्थनीज ने एथेंस में दर्शनशास्त्र और गणित की शिक्षा प्राप्त की।

इतिहास में इरैटोस्थनीज के व्यक्तिगत जीवन के विषय में कुछ सामान्य जानकारियां ही उपलब्ध हैं।लेकिन उनकी उपलब्धियों के जो स्रोत उपलब्ध हैं वो उनको महान भूगोलविद सिद्ध करते हैं। सर्वप्रथम उन्होंने ही भूगोल शब्द का प्रयोग किया था।

इरैटोस्थनीज के जीवन की विशेष बातें(Special points from the life of Eratosthenes)

इरैटोस्थनीज केवल भूगोल तक सीमित नहीं थे बल्कि उन्होंने लगभग सभी बौद्धिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।उन्होंने खगोलविज्ञान,इतिहास, दर्शनशास्त्र्, गणित व कामेडी पर किताबें लिखीं इसके अलावा उन्होंने कविता भी लिखी।

उनकी विभिन्न विषयों पर पकड़ ने उनके व्यक्तित्व को बहुत प्रभावशाली बना दिया था।उनके प्रभावशाली व्यक्तित्व तथा उनकी बहुमुखी प्रतिभा की वजह से उनको अलेकजेंड्रिया पुस्तकालय में निदेशक का पद मिला।अलेकजेंड्रिया पुस्तकालय उस समय की सबसे बड़ी बौद्धिक संस्था थी।ऐसा कहा जाता है कि उस  समय में भी अलेकजेंड्रिया पुस्तकालय में आधा  मिलियन से भी ज्यादा पुस्तकें थी।

यह एक ऐसी जगह थी जहां,जहां महान दार्शनिक कवि,नाटककार, गणितज्ञ और वैज्ञानिक अपनी अपनी खोजों के बारे में बात करने के लिए इकट्ठा होते थे।

इस पुस्तकालय में बैठक कक्ष और व्याख्यान कक्ष थे,ये पुस्तकालय इतना विशाल था की इसको हम आज के समय का विश्वविद्यालय कह सकते हैं।

इरैटोस्थनीज महान गणितज्ञ आर्कमिडिज के घनिष्ठ मित्र थे।आर्कमिडीज ने इरैटोस्थनीज को विधि नामक एक ग्रंथ भेट दिया और कहा ’चूंकि हमें पता है कि आप अपने काम की परवाह करते हैं,दर्शन शास्त्र के उत्कृष्ठ शिक्षक हैं और गणितीय शोध में रुचि रखते हैं,इसीलिए मैंने सोचा कि मैं आपको अपनी विशेष पद्धति के बारे में बता दूं।यह विधि आपको गणितीय गणनाएं करने तथा यांत्रिकी का उपयोग करने में आपकी मदद करेगी।

  • इरैटोस्थनीज के आलोचक भी थे और प्रशंसक भी।उनके आलोचक और प्रशंसक उनके लिए समान उपनामों का प्रयोग करते थे।
  • इनमे उनका एक नाम था बीटा 
  • बीटा से उनका आसय था की इरैटोस्थनीज लगभग हर विषय की जानकारी रखते थे लेकिन सर्वश्रेष्ठ किसी भी छेत्र में नहीं थे।
  • बीटा का उपयोग अपमान और तारीफ दोनो के लिए किया जा सकता है।

*उनका दूसरा नाम था द पेंटाथलीट 

द पेंटाथलीत का अर्थ होता है ऐसा व्यक्ति जो पांच अलग अलग खेल अच्छी तरह से खेल सकता है परंतु चैंपियन किसी में भी नहीं होता है।

लेकिन इरैटोस्थनीज ने अपने आप को दार्शनिक कहा।

उन्होंने कहा मैं सीखने का प्रेमी हूं।

इरैटोस्थनीज की  उपलब्धियां(Achivbment of Eratosthenes)

  • इरैटोस्थनीज ने दर्शनशास्त्र,भूगोल,गणित,खगोल विज्ञान आदि में विशेष योगदान दिया।लेकिन प्रमुख रूप से उनको भूगोल के पिता के रूप में जाना जाता है, क्योंकि उन्होंने ही पहली बार भूगोल शब्द का प्रयोग किया था।

उनकी खोजें निम्नलिखित हैं

  • ज्योग्राफिका की रचना
  • पृथ्वी की परिधि की गणना 
  • गणित की चलनी का अविष्कार 
  • शस्त्रागार क्षेत्र का निर्माण

जियोग्राफिका (Geografica)

अलेकजेंड्रिया के पुस्तकालय में प्रमुख लाइब्रेरियन के पद पर कार्य करते हुए उन्होंने पृथ्वी के बारे में एक व्यापक ग्रंथ की रचना की जिसे जियोग्राफिका नाम दिया। जियोग्राफिका की रचना उन्होंने तीन खंडों में की जो निम्नलिखित हैं

  • जियोग्राफिका के पहले खंड में उस समय की मौजूदा स्थिति तथा पृथ्वी की प्रकृति के बारे में बताया।उन्होंने बताया पृथ्वी ग्लोब के आकार की है।
  • जियोग्राफिका के दूसरे खंड में उन्होंने गणितीय गणना कर बारे में बताया,जिसका उपयोग उन्होंने धरती की परिधि निकालने में किया था।
  • जियोग्राफिका के तीसरे खंड में उन्होंने समानांतर और मेरिडियन लाइनों को दर्शाते हुए धरती का विस्तृत नक्शा तैयार किया। ये अक्षांश और देशांतर रेखाएं आज भीं उपयोगवमे हैं।                                               उन्होंने धरती को जलवायु के आधार पर पांच क्षेत्रों में विभाजित किया

           1 उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र

           2 उत्तरी शीतोष्ण कटिबंध क्षेत्र

           3 दक्षिणी शीतोष्ण कटिबंध क्षेत्र

           4 उत्तरी शीत कटिवंध

           5 दक्षिणी शीत कटिवंध

धरती की परिधि की गणना(Calculation of earth diameter)

अलेकजेंड्रिया के पुस्तकालय के निदेशक के रूप में काम करते हुए eratoshthneej के पास प्राचीन दुनिया का आधुनिक गूगल था।

इरैटोस्थनीज को ज्ञात था की 21 जून को सिएन नगर में दीवारों पर किसी भी चीज का प्रतिबिंब नही बनता क्योंकि सूरज ऊपर की ओर होता है,लेकिन में उसी दिन चीजों का छोटा छोटा प्रतिबिंब बनता है।अलेकजेंड्रिया के दक्षिण में सायने था इसलिए छाया के कोण का कोई मतलब होना चाहिए।

इरैटोस्थनीज ने निम्नलिखित गणना की

  • उन्हे ये पता था की धरती गोल है।
  • धरती पर पहुंचने पर सूरज की किरणे एक दूसरे के समांतर होती हैं।
  • इरैटोस्थनीज अलेकजेंड्रिया में छाया के कोण को मापते हैं,जब सायनें में कोई छाया नहीं बनती है
  • उनको सयाने और अलेकजेंड्रिया के बीच की दूरी पहले से पता थी।

गणना(Calculation)

आरेख से स्पष्ट है कि अलेकजेंड्रिया में पाया जाने वाला कोण z है, जोकि एक पूरे वृत्त का 50वा भाग है।

  • इसका मतलब था कि सायने से अलेकजेंड्रिया की दूरी धरती की परिधि की 1/50 भाग थी।
  • जैसा कि उनको पहले से ही सायने और अलेकजेंड्रिया के बीच की दूरी 5000 स्टीडिया है पता थी।
  • अतः उनकी गणना में पृथ्वी की परिधि 50×5000=250000 स्टेडिया प्राप्त हुई।

उनकी गणना पर टिप्पणी

  • इरैटोस्थनीज की गणना कितनी शुद्ध थी हम ये नही कह सकते क्योंकि स्टेडिया का मतलब अलग अलग लोगों के लिए भिन्न था।
  • इरैटोस्थनीज ने अपनी ऑन द मेजरमेंट ऑफ द अर्थ में यह बताया रहा होगा की वह किस स्टेडिया का प्रयोग किया था लेकिन दुर्भाग्य से उनकी मूल पुस्तक समय की धुंध में कहीं खो गई।
  • उनकी किताब पर निर्भर करते हुए की उन्होंने किस स्टेड का प्रयोग किया था,हम कह सकते है कि उनकी गणना सबसे अच्छी 1 प्रतिशत त्रुटि तथा सबसे खराब 30 प्रतिशत त्रुटि के भीतर थी।
  • आज के आलोचक इसे किसी भी तरह से देखें लेकिन यह उस समय की सबसे बड़ी उपलब्धि थी जब संसार को यह ज्ञात नही था की हमारी धरती गोल है।यह आश्चर्यजनक एवम आकर्षण का विषय है की 2000 साल पहले उन्होंने की थी की गणित का उपयोग करके धरती के विस्तार की गणना की जा सकती है।

इरैटोस्थनीज की छलनी (Prime number of Eratosthenes )

  •     इरैटोस्थनीज ने अपनी चलनी का प्रयोग करके इस समस्या का समाधान निकाला कि अभाज्य संख्याओं को व्यवस्थित एवम तार्किक रूप से कैसे खोजा जाए।
  • अभाज्या संख्याएं वें संखाएं होती हैं जिनका स्वयं के अतिरिक्त कोइबारक नहीं होता है।गणितज्ञ अभाज्य संख्याओं को इसी तरह से देखते हैं जैसे रसायनिक तत्त्वों को रसायनशास्त्री।
  • अभाज्य संख्याएं अन्य सभी संख्याओं को अभज्य खंड हैं।
  • पहली आठ अभाज्य संख्याएं 2,3,5,7,11,13,17,19 हैं।
  • उनकी एल्गोरिडम पद्धति में संख्याओं 1,2,3 आदि की सारणी सम्मिलित है और हरेक अभाज्य के गुणको को अलग करना फिर संख्या दो के गुणको से प्रारंभ करना फिर संख्या तीन के गुणक आदि को केवल मुख्य संख्याओं तक सम्मिलित करना।
  • इस विधि को गणित की चलनी के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह गैर अभाज्य संख्याओं को इसी तरह से छानने का कार्य करती है जैसे एक छलनी तरल पदार्थ से बाहर निकलती है।

शस्त्रागार छेत्र (The Almillary Spher )

  • महान युनानी खगोलशास्त्री और गणितज्ञ हिप्पार्कियस के अनुसार जो इरैटोस्थनीज की मृत्यु के कुछ वषों के भीतर पैदा हुए थे,इरैटोस्थनीज ने शस्त्रागार छेत्र का निर्माण किया था।1800 वर्षों तक जब तक दूरबीन 

का अविष्कार नहीं हुआ था, खगोल विज्ञान में खगोलीय पिंडों की स्थिति का निर्धारण करने के लिए शस्त्रागार छेत्र सबसे महत्वपूर्ण उपकरण था।

इरैटोस्थनीज की मृत्यु(Eratosthenes’s deth)

  • ऐसा कहा जाता है कि इरैटोस्थनीज अपने जीवन के अंतिम क्षणों में अंधे हो गए थे और 194 ईसा पूर्व जब वह 80 से 82 आयु के थे तब उनकी भूंख से मृत्यु हो गई।          
  •                             

Leave a Comment